होटल व्यवसायियों ने बताई अपनी मजबूरी कहा महंगाई 40 प्रतिशत बढ़ी लेकिन दाम लेने पड़ रहे पुराने

 

कोरोनाकाल में सर्वाधिक प्रभावित हास्पिटैलिटी, होटल, बैंक्वेट, एयरलाइंस उद्योग रहा है। यह उद्योग आज भी बैकलाग तोड़ने को प्रयासरत है, लेकिन बढ़ती महंगाई ने इसकी कमर तोड़ दी है।

इस क्षेत्र में उपयोग होने वाले उत्पादों की कीमत में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन संकट के दौर से गुजर रहा उद्योग 40 प्रतिशत दाम भी बढ़ा नहीं सकता है। ऐसे में 'नो प्राफिट, नो लास' पर उद्योग चलाना मजबूरी है।

 पिछले ढाई साल से कोरोनाकाल से यह उद्योग जूझ रहा है। जिन्होंने उस समय पैसा जमा कर बुकिंग कराई थी, वह आज बढ़े दाम नहीं दे सकते हैं। चूंकि वह भी इस शहर के निवासी हैं और हम भी उन्हीं निवासियों के साथ कामकाज करते है।

बुकिंग रद करने के बाद नियमानुसार पैसा वापस कर देना चाहिए, लेकिन संकट के दौरान पैसा पास नहीं रहा। ऐसे में आगे होने वाले कार्यक्रमों में उस पैसे को व्यवस्थित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज डीजल-पेट्रोल के दाम में वृद्धि से पूरी हास्पिटैलिटी, होटल, बैंक्वेट उद्योग 40 प्रतिशत अतिरिक्त आर्थिक बोझ के तले दबे हैं।

जो थाली एक हजार या 1100 रुपये में पड़ रही थी, आज यह 1500 रुपये पार कर चुकी है। इसकी वजह है आटा, दाल, चावल, घी, मसाला, दूध, पनीर, सब्जी से लेकर श्रम शक्ति और अनुरक्षण कार्य तक पर महंगाई की मार पड़ रही है। मजबूरी में ग्राहक को ये थाली 1200 रुपये में देना भारी पड़ रहा है। ऐसे में घाटा सहकर कारोबार संचालित किया जा रहा है।

जो आइसक्रीम पार्लर 15 हजार रुपये में बुक होता था, आज 21 हजार रुपये में बुक हो रहा है। एडवांस बुकिंग के कारण ग्राहकों से वर्तमान में बढ़ा दाम चार्ज नहीं हो सकता है। होटल आरेंज पाइ के निदेशक राकेश कत्याल ने बताया कि नोएडा ही नहीं, एनसीआर के तमाम होटल विजिटर के दम पर संचालित हो रहे थे, क्योंकि लोग बिजनेस के सिलसिले में यहां आते थे। उनके विदेशी बायर्स आकर ठहरते थे। कोरोनाकाल में यह गतिविधि बंद है।