यूरोपीय व अफ्रीकी देशों में बढ़ी गोरखपुर के गेहूं-मैदा की मांग, यूक्रेन संकट ने भारत के गेहूं की मांग विदेश में बढ़ा दी

 

गोरखपुर: रूस के हमले के बाद पैदा हुए यूक्रेन संकट ने भारत के गेहूं की मांग विदेश में बढ़ा दी है। इसका असर गोरखपुर व आसपास के जिलों पर भी पड़ा है। पिछले तीन महीने से गोरखपुर, बस्ती व देवीपाटन मंडल से भारी मात्रा में गेहूं व मैदा यूरोपीय, अफ्रीकी एवं अन्य देशों में भेजा जा रहा है।

इस क्षेत्र से फ्लोर मिल संचालक व व्यापारी स्वयं निर्यात करने की बजाय बड़े निर्यातकों के माध्यम से गेहूं व मैदा बाहर भेज रहे हैं। यूक्रेन संकट से पहले जहां हर महीने पांच से सात रेक गेहूं बाहर भेजा जाता था वहीं अब 80 से 120 रैक गेहूं व मैदा बाहर जा रहा है। मांग और है लेकिन उद्यमियों व व्यापारियों की मानें तो रेलवे अभी इतने ही रैक उपलब्ध करा पा रहा है। एक रेक में करीब 2650 टन गेहूं लोड होता है।

यूक्रेन संकट से पहले हर महीने पांच से सात रेक गेहूं ही भेजा जाता था बाहर

गोरखपुर एवं आसपास के जिलों में संचालित फ्लोर मिलों के पास स्थानीय बाजार के साथ-साथ विदेश से भी मांग आ रही है। मैदा के साथ फ्लोर मिल संचालक गेहूं भी बाहर भेज रहे हैं। यहां के उद्यमियों एवं व्यापारियों ने निर्यातकों से संपर्क किया है। ट्रकों से लदकर गेहूं आसपास के लोडिंग प्वाइंट तक ले जाया जा रहा है। वहां से रेक में लोड कर गेहूं को मुंबई एवं अन्य बड़े शहरों के पोर्ट भेजा जा रहा है। यूरोपीय एवं अफ्रीकी देशों के अलावा यह गेहूं यमन, कोरिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, वियतनाम, यूएई आदि देशों को भी भेजा जा रहा है।

आटा की मांग काफी कम है। बस्ती में फ्लोर मिल संचालित करने वाले विनोद बताते हैं कि स्थानीय बाजार में भी आपूर्ति हो रही है, बाहर भी भारी मात्रा में गेहूं व मैदा भेजा जा रहा है। यह स्थिति पिछले तीन महीने से आयी है। गोरखपुर में फ्लोर मिल संचालित करने वाले आकाश जालान का कहना है कि आसपास के कई स्टेशनों से रेक में गेहूं व मैदा लोड हो रहा है। ट्रकों से भी गेहूं अलग-अलग पोर्ट तक भेजा जा रहा है।

मिल रही अच्छी कीमत

इस बार सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये घोषित किया गया है लेकिन बाहर मांग बढ़ने से खुले बाजार में गेहूं का मूल्य बढ़ गया है। गोरखपुर व आसपास के क्षेत्र से बाहर गेहूं भेजने वाले उद्यमियों एवं व्यापारियों को गेहूं की प्रतिकिलो कीमत 22.50 रुपये एवं मैदा की कीमत 23.50 रुपये प्रतिकिलो मिल रहा है। आशंका जताई जा रही है कि खुले बाजार में अधिक कीमत मिलने से सरकारी केंद्रों पर गेहूं की खरीद प्रभावित हो सकती है।

पिछले तीन महीने से गोरखपुर के गेहूं की मांग खूब बढ़ी है। पहले रेट अधिक मिलने पर हर महीने पांच से सात रेक बाहर जाती थी लेकिन इस समय हर महीने 80 से 120 रैक जा रही है। गोरखपुर एवं आसपास के क्षेत्र से भारी मात्रा में गेहूं व मैदा बाहर भेजा जा रहा है हालांकि स्थानीय बाजार में उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ा है