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लखनऊ को मिली जीत, डिकॉक के 80 रन के आगे दब गई उन 18 गेंदों की कहानी

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लखनऊ को मिली जीत, डिकॉक के 80 रन के आगे दब गई उन 18 गेंदों की कहानी 

दिल्ली के खिलाफ लखनऊ को मिली जीत में हर तरफ क्विंटन डिकॉक (Quinton de Kock) की बल्लेबाजी की चर्चा है.

क्विंटन डिकॉक ने गुरूवार को 52 गेंद पर शानदार 82 रन ठोंककर आईपीएल-2022 (IPL 2022) टीम को जीत दिलाई. उन्होंने अपनी पारी में 9 चौके और 2 छक्के लगाए. दिल्ली ने लखनऊ के सामने 150 रन का लक्ष्य रखा था. डिकॉक की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत लखनऊ ने ये लक्ष्य सिर्फ 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया. डिकॉक को मैन ऑफ द मैच चुना गया. लेकिन उनकी वाहवाही में जेसन होल्डरऔर आवेश खान (Avesh Khan and (Jason Holder) का कारनामा थोड़ा फीका पड़ गया. इन दोनों गेंदबाजों की सूझबूझ भरी गेंदबाजी की बदौलत ही दिल्ली की टीम स्कोरबोर्ड पर लाख चाह कर भी 150 रन के आंकडें को पार नहीं कर पाई. दिल्ली की बल्लेबाजी के दौरान आखिरी 18 गेंद का खेल बड़ा साबित हुआ. 150 रन के छोटे लक्ष्य पर कोई करिश्मा ही दिल्ली को जीत दिला सकता था,जो हुआ नहीं.

आखिरी तीन ओवर में बने सिर्फ 19 रन

जेसन होल्डर और आवेश खान ने आखिरी तीन ओवर में सिर्फ 19 रन दिए. जेसन होल्डर ने 18वें ओवर में 6 रन दिए. आवेश खान ने 19वें ओवर में सिर्फ 6 रन दिए. 20वें ओवर में भी जेसन होल्डर ने बल्लेबाजों को सिर्फ 7 रन बनाने का मौका दिया. ये बड़ी उपलब्धि तब हो जाती है जब सामने फॉर्मेट के सबसे आक्रामक बल्लबाजों में से एक ऋषभ पंत बल्लेबाजी कर रहे हों. साथ ही जब ओस भी अपना काम कर रही हो. लखनऊ के कप्तान केएल राहुल आखिरी ओवरों में तौलिए से लगातार गेंद को सुखाने का काम कर रहे थे. लेकिन जेसन होल्डर और आवेश खान भी हर तरह की चुनौतियों का सामना करने को तैयार थे. उनकी रणनीति सिर्फ एक थी कि बल्लेबाज को हाथ खोलने का मौका नहीं देना है.

10-15 रन और बनते तो बदल सकती थी कहानी

यूं तो कोई भी खेल किंतु परंतु जैसे शब्दों से नहीं चलता है. लेकिन व्यवहारिक बात ये है कि अगर दिल्ली की टीम ने 150 की बजाए 165 रनों के आस पास का लक्ष्य रखा होता तो लखनऊ को दिक्कत हो जाती. क्योंकि लखनऊ में भी क्विंटन डीकॉक के आउट होने के बाद मिडिल ऑर्डर नहीं चला. नतीजा बाद के ओवरों में उसे 12 गेंद पर 19 रन चाहिए थे. मुस्तफिजुर और शार्दुल ठाकुर को आखिरी दो ओवर फेंकने थे. मुस्तफिजुर ने 19वें ओवर में ही 14 रन दे दिए. आखिरी ओवर में जीत अब औपचारिकता रह गई थी. यहीं अगर 10-12 रन और होते तो लखनऊ के लिए जीत इतनी आसान नहीं होने वाली थी. दिलचस्प बात एक और भी है. जो जीत और हार के बीच का बड़ा फर्क हैं. लखनऊ के गेंदबाजों ने आखिरी तीन ओवर में 19 रन दिए जबकि दिल्ली के गेंदबाज आखिरी दो ओवर में 19 रन डिफेंड नहीं कर पाए.